नई दिल्ली/कोलकाता: Supreme Court of India ने I-PAC से जुड़े मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने जांच एजेंसी की कार्रवाई में हस्तक्षेप को गंभीर बताते हुए कहा कि इस तरह के कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
दरअसल, यह मामला जनवरी में Enforcement Directorate (ED) की छापेमारी के दौरान का है, जब ममता बनर्जी I-PAC से जुड़े एक व्यक्ति के घर पहुंच गई थीं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप उचित नहीं है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसियों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाना चाहिए और इस तरह की घटनाएं गलत संदेश देती हैं।
क्या है I-PAC मामला?
I-PAC (Indian Political Action Committee) एक राजनीतिक रणनीति बनाने वाली संस्था है, जो विभिन्न चुनाव अभियानों में काम करती है। इस केस में ED द्वारा वित्तीय अनियमितताओं की जांच की जा रही है।
कोर्ट का सख्त संदेश
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में अहम माना जा रहा है। इससे यह साफ संकेत गया है कि जांच एजेंसियों के काम में किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।












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