पीरपैंती में अदानी पावर प्लांट पर बढ़ता विवाद, विधायक मुरारी पासवान ने खोला मोर्चा

मुरारी पासवान ने पीरपैंती में बन रहे Adani Power प्लांट को लेकर बड़ा हमला बोला है। क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्यों के बीच स्थानीय लोगों की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अदानी मैनेजमेंट मनमाने तरीके से काम कर रहा है और जिन लोगों ने विरोध किया, उन्हें नौकरी या अन्य लालच देकर चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
पीरपैंती और आसपास के गांवों में जमीन, विस्थापन, मुआवजा और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। गांवों में यह चर्चा आम हो चुकी है कि “जिसने विरोध किया, उसे किसी न किसी तरीके से शांत करा दिया गया।” इससे लोगों के बीच नाराजगी और अविश्वास दोनों बढ़ते जा रहे हैं।
सबसे गंभीर आरोप प्रशासन की भूमिका को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जिला प्रशासन निष्पक्ष भूमिका निभाने के बजाय अदानी मैनेजमेंट के पक्ष में काम करता दिख रहा है। लोगों का आरोप है कि आम आदमी की शिकायतों को दबाया जा रहा है, जबकि कंपनी को हर स्तर पर प्रशासनिक सहयोग मिल रहा है।
इसी मुद्दे पर अब भाजपा के ही विधायक Murari Paswan खुलकर सामने आ गए हैं। विधायक ने सीधे तौर पर जिला प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि “डीएम अदानी के लिए काम कर रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र में विकास और प्रशासनिक फैसलों को लेकर जनप्रतिनिधि को पूरी तरह बायपास किया जा रहा है और कंपनी अपनी मनमर्जी से काम कर रही है।
विधायक का कहना है कि जनता की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। जिन लोगों की जमीन गई, जिनके घर-परिवार प्रभावित हुए, उनकी परेशानियों पर कोई गंभीर चर्चा नहीं हो रही। उन्होंने साफ कहा कि अगर प्रशासन और कंपनी का यही रवैया रहा तो आने वाले समय में बड़ा जनआंदोलन खड़ा हो सकता है।
मुरारी पासवान ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह इस पूरे मामले को बिहार विधानसभा में उठाएंगे। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता से ऊपर कोई कंपनी नहीं हो सकती और अगर किसी कॉरपोरेट समूह के लिए प्रशासन जनता की आवाज दबाने लगे, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।
पीरपैंती में बन रहा यह पावर प्लांट एक तरफ रोजगार और विकास के बड़े दावे कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोगों के भीतर असंतोष भी तेजी से बढ़ रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन जनता की शिकायतों को गंभीरता से सुनेगा या फिर विकास के नाम पर लोगों की आवाज यूं ही दबती रहेगी।

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